3251
Brock string: A help device to improve fusional Power, to improve concentration
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बच्चों का मोबाइल उपयोग बड़ा रहा हैढर दृष्टि दोष
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सही समय पर जांच करने पर चश्मे ,प्रिज्म व व्यायाम से इसे सही किया जा सकता है।
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मधुमेह की वजह से आंखों की रोशनी कमजोर हो सकती है। इसलिए रखें थोड़ा ध्यान
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अपनी आँखों को रगड़ने से बचें, खासकर यदि वे खुजली या परेशान हैं। आँखों को मसलने से जलन, लालिमा और संक्रमण हो सकता है। यदि आपकी आँखें परेशान कर रही हैं, तो उन्हें ठंडे पानी से धो लें या डॉक्टर से सलाह लें।
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स्कूल चलें हम अभियान के अंतर्गत पुर्सवानी विजन केयर नीमच द्वारा 15 जुन 2025 से 31 जुलाई 2025 तक संस्थान व स्कूलों के माध्यम से लगभग 250 बच्चों की निशुल्क आखों की जांच की गई ,इस दौरान कई बच्चों को पहली बार दृष्टि दोष देखा गया, जिन्हे उचित परामर्श हेतु सलाह दी गई
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अंधेरे में मोबाइल चलाने या टीवी देखने से आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है, खासकर अगर यह लंबे समय तक किया जाए। इससे आंखों में सूखापन, थकान, और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, यह नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है।
आंखों पर तनाव:
अंधेरे में, स्क्रीन की रोशनी आंखों पर अधिक जोर डालती है, जिससे तनाव और थकान हो सकती है।
नींद में खलल:
मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम कर सकती है, जो नींद के लिए जरूरी है, जिससे नींद में खलल पड़ सकता है।
सूखी आंखें:
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से पलकें झपकाने की दर कम हो जाती है, जिससे आंखें सूख सकती हैं।
धुंधली दृष्टि:
कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि अंधेरे में स्क्रीन का उपयोग करने से आंखों की रोशनी कम हो सकती है, हालांकि इस पर अभी भी शोध जारी है।
अन्य समस्याएं:
कुछ लोगों को अंधेरे में स्क्रीन देखने से सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
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ages, we have been told that “eat your carrots; they are good for your eyes”, and the potent benefit of this root vegetable actually proves this age-old phrase right! It is believed that carrots are loaded with nutrients that can help improve eye health, boost night vision and also reduce the impact of macular degeneration
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बारिश के मौसम में आंखों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए आंखों की देखभाल करना बहुत जरूरी है।
यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:
1.हाथों को साफ रखें:
बारिश में, हाथों में बैक्टीरिया और वायरस आसानी से लग जाते हैं, जो आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसलिए, हाथों को बार-बार धोना और सैनिटाइज करना महत्वपूर्ण है।
2.आंखों को बार-बार न छुएं:
अपनी आंखों को छूने से बचें, खासकर जब आपके हाथ साफ न हों।
3.आंखों को साफ पानी से धोएं:
बारिश के पानी या किसी भी तरह की गंदगी को आंखों से हटाने के लिए, उन्हें साफ, ठंडे पानी से धोएं।
4.तौलिया या रूमाल साझा न करें:
अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता वस्तुओं को दूसरों के साथ साझा करने से बचें, क्योंकि इससे संक्रमण फैल सकता है।
5 कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग कम करें:
यदि आप कॉन्टैक्ट लेंस पहनते हैं, तो बारिश के मौसम में उनका उपयोग कम करें, क्योंकि नमी के कारण बैक्टीरिया उन पर पनप सकते हैं।
6.धूप का चश्मा पहनें:
धूप का चश्मा पहनने से आपकी आंखें धूल, मलबे और बारिश के पानी से बची रहेंगी।
7.आंखों में मेकअप से बचें:
बारिश के मौसम में, आंखों में मेकअप करने से बचें, क्योंकि यह संक्रमण का कारण बन सकता है।
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विटामिन ए की कमी से होने वाली बीमारियां ये हैं:
1.रतौंधी
2.आंखों की रोशनी कम होना
3.सूखी आंखें
4.आंखों के सफ़ेद भाग में धब्बे
5.घाव जल्दी न भरना
7.मोतियाबिंद
8.जीरोप्थैलमिया
9.संक्रमणों का खतरा
विटामिन ए की कमी को पूरा करने के लिए:
गाजर, केले, ब्रोकली, संतरा, शकरकंद, हरी सब्ज़ियां, पीले रंग की सब्ज़ियां, फलियां इत्यादि का सेवन करना चाहिए.
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बच्चों में मोबाइल के उपयोग के संभावित दुष्प्रभाव:
आंखों पर प्रभाव:
मोबाइल फोन की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों के लिए हानिकारक हो सकती है, जिससे आंखों में सूखापन, थकान और दृष्टि दोष हो सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य:
अत्यधिक स्क्रीन समय बच्चों में चिंता, अवसाद, और ध्यान की कमी जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है.
सामाजिक-भावनात्मक विकास:
मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग बच्चों को वास्तविक दुनिया से दूर कर सकता है और सामाजिक कौशल के विकास में बाधा डाल सकता है.
नींद की समस्या:
मोबाइल फोन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के पैटर्न को बाधित कर सकती है, जिससे बच्चों को सोने में कठिनाई हो सकती है.
व्यवहार संबंधी समस्याएं:
कुछ बच्चों में मोबाइल फोन की लत के कारण चिड़चिड़ापन, आक्रामकता, और अन्य व्यवहार संबंधी समस्याएं देखी जा सकती हैं.
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लिवर सिरोसिस और आंखें:
पीलिया:
लिवर सिरोसिस में, लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता है, जिससे बिलिरुबिन नामक पदार्थ का संचय होता है। यह बिलिरुबिन आंखों के सफेद भाग (स्क्लेरा) और त्वचा को पीला कर देता है.
विटामिन ए की कमी:
कुछ मामलों में, लिवर सिरोसिस से विटामिन ए की कमी हो सकती है, जो आंखों की समस्याओं का कारण बन सकती है.
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लाल आंखों के सामान्य कारण:
एलर्जी:
पराग, धूल, पालतू जानवरों की रूसी, या अन्य एलर्जी कारकों के कारण आंखों में एलर्जी हो सकती है, जिससे लालिमा और खुजली हो सकती है।
आंखों की थकान:
लंबे समय तक कंप्यूटर या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग करने, या पर्याप्त नींद न लेने से आंखों में थकान हो सकती है, जिससे लालिमा हो सकती है।
कंजक्टिवाइटिस (गुलाबी आंख):
यह एक सामान्य आंखों का संक्रमण है जो बैक्टीरिया या वायरस के कारण हो सकता है, और इससे आंखें लाल, खुजलीदार, और पानीदार हो सकती हैं।
सूखी आंखें:
जब आंखें पर्याप्त आंसू नहीं बनाती हैं, तो यह सूखापन और जलन पैदा कर सकती है, जिससे लालिमा हो सकती है।
कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग:
कॉन्टैक्ट लेंस का गलत तरीके से उपयोग करना, या उन्हें बहुत लंबे समय तक पहनना, आंखों में जलन और लालिमा पैदा कर सकता है।
आंखों में चोट:
किसी भी प्रकार की चोट, जैसे कि आंखों में कुछ चला जाना, या किसी वस्तु से टकराना, लालिमा का कारण बन सकता है।
पर्यावरणीय कारक:
वायु प्रदूषण, धुआं, धूल, और शुष्क हवा, आंखों में जलन और लालिमा पैदा कर सकते हैं।
जीवनशैली:
धूम्रपान, शराब का सेवन, और नींद की कमी, आंखों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं और लालिमा का कारण बन सकते हैं।
गंभीर कारण:
ग्लूकोमा:
यह एक ऐसी स्थिति है जो ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाती है, और इससे आंखों में दर्द, लालिमा, और दृष्टि हानि हो सकती है।
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आर्मी और नेवी में, कुछ विशिष्ट कार्यों के लिए रंग दृष्टि (color vision) का होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि कई स्थितियों में रंगों की पहचान करना आवश्यक होता है, जैसे कि संकेतों, नक्शों और उपकरणों को समझना।
रंग दृष्टि के बिना, कुछ कार्यों को करना मुश्किल हो सकता है, जो संभावित रूप से खतरनाक भी हो सकता है। उदाहरण के लिए:
1.संकेतों और नक्शों को समझना:सैन्य अभियानों में, विभिन्न रंगों के संकेतों और नक्शों का उपयोग किया जाता है, जिनकी पहचान रंग दृष्टि के बिना करना मुश्किल हो सकता है।
2 उपकरणों का संचालन:कुछ उपकरणों को संचालित करने के लिए रंगों की पहचान करना आवश्यक होता है।
3.खतरों की पहचान:कुछ खतरों को रंगों के माध्यम से पहचाना जा सकता है, जैसे कि विस्फोटक या विषैले पदार्थों के रंग।
वायु सेना और नौसेना:वायु सेना और नौसेना में, रंग दृष्टि का न होना अयोग्यता का कारण बन सकता है, क्योंकि वहां रंगों की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है।
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High Blood Pressure
High Blood Pressure, also known as Hypertension, can cause changes in the blood vessels of your eyes, known as hypertensive retinopathy
. It can lead to vision problems and is also a warning sign of damage to other organs like the heart and kidneys.
What to Look For:
Blurred vision
Headaches or eye pain
Redness or swelling in the eyes
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The new findings — identified using human plasma samples and mouse models of macular degeneration — suggest that increasing the amount of a molecule called apolipoprotein M (ApoM) in the blood fixes problems in cholesterol processing that lead to cellular damage in the eyes and other organs
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लोको पायलट के लिए रंग दृष्टि (कलर विजन) की आवश्यकता इसलिए है ताकि वे सुरक्षित रूप से ट्रेन चला सकें और संकेतों को सही ढंग से समझ सकें।
विस्तार से:
सुरक्षा:
लोको पायलट को पटरियों पर लगे विभिन्न संकेतों, जैसे कि सिग्नल लाइट और अन्य दृश्य संकेतकों को पहचानना होता है। ये संकेत आमतौर पर लाल, हरे और पीले जैसे रंगों में होते हैं।
यदि लोको पायलट इन रंगों को सही ढंग से नहीं पहचान पाता है, तो वह गलत समय पर ब्रेक लगा सकता है या खतरे की स्थिति में सही कार्रवाई नहीं कर पाएगा, जिससे दुर्घटना हो सकती है।
भारतीय रेलवे में लोको पायलट के पद के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के लिए आरआरबी (रेलवे भर्ती बोर्ड) द्वारा निर्धारित रंग दृष्टि के मानक होते हैं।
इन मानकों को पूरा करना अनिवार्य है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोको पायलट सुरक्षित रूप से ट्रेन चला सकें।
पुर्सवानी विजन केयर पर कलर विजन की जांच भी की जाती है
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कभी -कभी एक आंख की रोशनी लगभग सामान्य रहती है यां न्यूनतम नंबर रहता है लेकिन दूसरी आंख मे काफी ज्यादा नंबर रहता है, इस स्थिति को एनआइसोमेटरोपिया कहा जाता है।
मूलत: देखा गया है काफी ज्यादा उम्र मे आकर हमे एसी स्थिति के बारे मे मालूम चलता है जिसकी वजह से पृभावित आंख मे रोशनी बढ़ने की संभावना काफी कम हो जाती है, इसलिए सामान्य व्यक्ति को भी अपनी आंखों की जांच करवाना चाहिए.
बच्चों मे आंखों की जांच करवाने की सलाह इसीलिए दी जाती है, ,एसा इसलिए भी करना चाहिये क्योंकि कभी किसी कारण से चोट इत्यादि से अगर सामान्य आंख पृभावित हो तो हमे अपनी दूसरी आंख की क्षमता के बारे मे ज्ञात हो ,
कारखानो मे काम करने वालो को इसीलिए चश्मा लगाने को कहा जाता है।
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चश्मा पहनने के लिए:
1. हाथों को साफ करें:
चश्मा छूने से पहले, अपने हाथों को साबुन और पानी से धो लें या सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
2. चश्मे को सही तरीके से पकड़ें:
चश्मे को उसके फ्रेम के दोनों तरफ से पकड़ें, ताकि लेंस पर उंगलियों के निशान न लगें।
3. अपने चेहरे के सामने चश्मा रखें:
अपनी आंखों के सामने चश्मे को रखें, और धीरे से अपने कानों के ऊपर चश्मे के डंडे (टेम्पल्स) को रखें।
4. सुनिश्चित करें कि चश्मा ठीक से फिट हो:
चश्मा ठीक से फिट होना चाहिए, न तो बहुत ढीला और न ही बहुत तंग।
चश्मा हटाने के लिए:
1. दोनों हाथों का उपयोग करें:
चश्मे को हटाने के लिए, अपने दोनों हाथों का उपयोग करें, प्रत्येक हाथ से एक डंडे को पकड़ें।
2. धीरे से हटाएँ:
अपने कानों के पीछे से चश्मे के डंडे को धीरे से हटाएँ।
3. सुरक्षित जगह पर रखें:
जब आप चश्मा नहीं पहन रहे हों, तो उसे सुरक्षित जगह पर रखें, जैसे कि चश्मे के डिब्बे में, ताकि वह क्षतिग्रस्त न हो।
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अधिकांश कार्यालय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा नेत्र सुरक्षा जोखिम कंप्यूटर स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आता है।
नीली रोशनी के अत्यधिक संपर्क से डिजिटल आई स्ट्रेन और रेटिना को नुकसान हो सकता है।
जैसे-जैसे कार्यालय कर्मचारी अपनी स्क्रीन के सामने अधिक से अधिक समय बिताते हैं - और अक्सर कई स्क्रीन के सामने - हर साल नीली रोशनी के संपर्क का स्तर बढ़ता जाता है।
चाहे आप किसी भी उद्योग में हों, काम पर अपनी आँखों को सुरक्षित रखने के लिए उचित सुरक्षात्मक चश्मा पहनना महत्वपूर्ण है।
यह अनुमान लगाया गया है कि उचित सुरक्षा चश्मा पहनने से कार्यस्थल पर होने वाली 90% आँखों की चोटों की गंभीरता को कम किया जा सकता है या उन्हें टाला जा सकता है।
चाहे आप उच्च जोखिम वाले उद्योग में हों या नहीं, नियमित रूप से व्यापक नेत्र परीक्षण करवाना एक अच्छा विचार है ।
6444
1.सुबह का अलार्म ..... मोबाइल
2. भगवान का गाना ..... मोबाइल
3. आफिस से पहले. .... मोबाइल
4. समय देखना है ... मोबाइल
5. बच्चा रो रहा है। .... मोबाइल
6. पढा़ई करना है ... मोबाइल
7. खाना कैसे बनाना है (मोबाइल) you tube
8. खेलना है तो भी .... मोबाइल
9. टाइम पास नही होता. ... मोबाइल
10. आनलाइन वर्क ... मोबाइल
11. बेंक का काम. .. मोबाइल
12. आनलाइन खरीदारी.... मोबाइल
6694
1. काफी नजदीक से मोबाइल के उपयोग से आंख की बाहरी व आंतरिक मांशपेशियों मे तनाव व थकान जो सिर दर्द का कारण बनता है साथ ही दृष्टि दोष के लिए जिम्मेदार
2. पलकों के कम झपकाने की आदत से आंखों मे सुखापन व दृष्टि दोष
3. एकाग्रता मे कमी (जितनी देर हम पुस्तक से पढ़ा करते थे) उस तरह से नही पढ़ पाते
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हर काम के लिए हमे मोबाइल की जरूरत है
छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गो का जीवन भी मोबाइल पर निर्भर है
6998
उम्र: 30 वर्ष
शिकायत . सिरदर्द
क्या करते हैं? : सिलाई ,पढ़ाई,
आज से पहले आंखों की जांच कराई?: नही मुझे सब दिखाई देता है इसलिए नही कराई
फिर क्या इलाज करते हैं? : बस एक गोली हर रोज
कितने समय से : पिछले 3 सालो से
गोली की कीमत : 5 रू.
5 ×30 = 150 रु हर महीने, 1800/ हर साल तीन साल मे 5400 / की गोली
पैसो के साथ शरीर का भी नुकसान, न बने अंजान
हे अगर कोई तकलीफ सही तरीक से करे पहचान
कभी कभी समस्याओं का समाधान सरल होता है। पर समय ओर जानकारी के अभाव में सही समाधान नही मिलता Take Care for your eyes
Purswani Vision Care NIMACH
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संक्रमण:
बारिश के पानी में धूल, बैक्टीरिया और रसायन हो सकते हैं, जो आँखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं.
1. कंजंक्टिवाइटिस (कंजंक्टिव में सूजन):
बारिश के पानी में मौजूद बैक्टीरिया या वायरस कंजंक्टिवाइटिस का कारण बन सकते हैं, जिससे आँखों में लालिमा, खुजली और चिपचिपापन हो सकता है.
2.सूखी आँखें:
बारिश के पानी के संपर्क में आने से आँखों का प्राकृतिक तेल कम हो सकता है, जिससे सूखी आँखें हो सकती हैं.
हाइड्रोफोबिक ऑप्टिकल कोटिंग एक पतली परत होती है जो ऑप्टिकल उपकरणों की सतह पर लागू की जाती है। यह पानी को पीछे हटाती है, जिससे ऑप्टिकल सतहें साफ और स्पष्ट बनी रहती हैं।
हाइड्रोफोबिक कोटिंग्स के कुछ लाभ:
स्व-सफाई:
कोटिंग पानी और गंदगी को सतह पर चिपकने से रोकती है, जिससे सतह को साफ करना आसान हो जाता है।
स्पष्ट दृष्टि:
कोटिंग पानी की बूंदों और धब्बे को दूर करती है, जिससे दृश्यता में सुधार होता है।
धुंध से बचाव:
कोटिंग पानी की बूंदों को सतह पर जमा होने से रोकती है, जिससे धुंध को रोकने में मदद मिलती है।
7544
उम्र 25 वर्ष
शिकायत. सिरदर्द बना रहता है, चींजे दिखती है ,नजर बराबर है पर धुंधला पन रहता है, साफ नहीं दिखती,दवाई का जबतक असर रहता है सिरदर्द मे आराम रहता है
जांच करने पर दोनो आंखों की नजर 6/9 आ रही थी लेकिन चश्मे का कोई नंबर नही आ रहा था, आंख का आंतरिक दबाव भी सामान्य रहा ,विस्तृत जांच करने पर दोनो आंखों की नस Optic nerve पर सूजन पाई गई
7946
उम्र 16 वर्ष
शिकायत . फटाखे द्वारा चोट लगने से दिखने लगा कम
प्राथमिक जांच में मोतियाबिंद पाया गया साथ ही कार्निया भी क्षतिगृस्त हुआ जिनका समय रहते आपरेशन किया गया ,लेकिन नजर में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया ,अन्य जांच OCT किया गया जिस जांच मे देखा गया की पर्दे में छेद हो चुका है।
8445
वर्षा 2023 मे 6 माह के मध्य लगभग 57 मरीजों को आंख के पर्दे पर सूजन देखी गई जिसे CSCR के नाम से जाना जाता है 30 वर्ष से 40 वर्ष की आयु के मध्य सबसे ज्यादा मरीज पाए गए. इस स्थिति के कुछ मूल कारण हैं, जिसे हमारे द्वारा रोका जा सकता है।
1. मानसिक तनाव
2. नींद की कमी
3. किसी तरह से स्टेरॉइड्स दवाईयों का उपयोग
4. उच्च रक्त चाप
5.धूम्रपान